असम चुनाव: झारखंड मुक्ति मोर्चा का बड़ा फैसला, 19 सीटों पर अकेले लड़ेगी चुनाव

रांची | असम विधानसभा चुनाव को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बीच चल रही सीट शेयरिंग की बातचीत आखिरकार बेनतीजा रही। लंबी चर्चा के बावजूद दोनों दल सीटों के बंटवारे पर सहमति नहीं बना सके।

कांग्रेस जहां सात सीटों से अधिक देने को तैयार नहीं थी, वहीं JMM करीब 20 सीटों पर दावा कर रही थी। इसी खींचतान के कारण गठबंधन की संभावनाएं खत्म हो गईं।

🔥 JMM अब अकेले मैदान में

गठबंधन की बातचीत विफल होने के बाद JMM ने बड़ा राजनीतिक फैसला लेते हुए असम में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है।

पार्टी के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने जानकारी दी कि पार्टी 19 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी, जबकि एक सीट भाकपा माले के लिए छोड़ी गई है।

नामांकन की अंतिम तारीख नजदीक होने के कारण पार्टी ने अपनी रणनीति को तेजी से अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।

🏹 ‘तीर-धनुष’ चुनाव चिह्न से बढ़ा जोश

चुनाव से पहले JMM को एक बड़ी राहत मिली है। पार्टी को असम में भी उसका पारंपरिक ‘तीर-धनुष’ चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने की मंजूरी मिल गई है।

इससे कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। पार्टी का मानना है कि एक समान पहचान के साथ चुनाव लड़ने से मतदाताओं तक पहुंच बनाना आसान होगा।

🎯 टी-ट्राइब और आदिवासी वोट बैंक पर फोकस

JMM की रणनीति मुख्य रूप से असम के टी-ट्राइब और आदिवासी वोट बैंक पर केंद्रित है। माना जाता है कि राज्य की करीब 35–40 सीटों पर इन मतदाताओं का प्रभाव निर्णायक होता है।

पिछले एक साल से पार्टी इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी हुई है।

👥 नेतृत्व की सक्रिय भूमिका

पार्टी के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय लगातार असम में सक्रिय हैं और संगठन को मजबूत करने में लगे हैं।

वहीं हेमंत सोरेन भी दो बार असम दौरा कर चुके हैं, जहां उन्होंने आदिवासी अस्मिता और सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

📊 पहले से चल रही थी तैयारी

असम में JMM की सक्रियता अचानक नहीं बढ़ी है। इसके पीछे पहले से रणनीतिक तैयारी चल रही थी।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंत्री चमरा लिंडा और सांसद विजय हांसदा की टीम को असम भेजा था, जिसने जमीनी हालात का अध्ययन किया। इसके बाद खुद मुख्यमंत्री ने भी दौरा कर राजनीतिक माहौल को समझा।

❓ क्या बदलेगा असम का सियासी समीकरण?

JMM के इस फैसले ने असम की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। अब देखना होगा कि पार्टी अकेले चुनाव लड़कर कितना प्रभाव डाल पाती है और क्या यह फैसला राज्य के सियासी समीकरण को बदल पाएगा।

 

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The LokSamvad
Author: The LokSamvad

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